आसान शब्दों में समझें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के क्या हैं मायने

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आसान शब्दों में समझें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के क्या हैं मायने

आसान शब्दों में समझें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के क्या हैं मायने

आइये समझने की कोशिश करते हैं कि पीएम मोदी ने इन सब बातों में ध्यान में रखते हुए कोरोना से लड़ाई की तैयारी को किस तरह आगे बढ़ाया है:

आसान शब्दों में समझें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के क्या हैं मायने

 

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने संबोधन में लॉकडाउन (Lockdown) को 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान किया है. साथ ही उन्होंने सात संकल्प भी बताए हैं, जिसके जरिये कोरोना से जंग में फतह हासिल की जा सकती है. वैसे, काफी हद तक यह पहले ही साफ हो गया था कि लॉकडाउन को मई तक बढ़ाया जा सकता है. इसकी वजह कोरोना के मामलों में लगातार हो रहा इजाफा है. देश में संक्रमितों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो गई है. साथ ही मृतकों के आंकड़ों में भी इजाफा हुआ है. आइये समझने की कोशिश करते हैं कि पीएम मोदी ने इन सब बातों में ध्यान में रखते हुए कोरोना से लड़ाई की तैयारी को किस तरह आगे बढ़ाया है:

कोरोना रोकने का एकमात्र तरीका लॉकडाउन

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में साफ किया कि कोरोना से बचाव के लिए लॉकडाउन बढ़ाना एकमात्र तरीका है. दरअसल, वायरस के संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच कई राज्यों ने पीएम से लॉकडाउन बढ़ाने की अपील की थी. इसके अलावा, कड़े उपायों पर अमल न करने वाले दुनिया के कई देशों का हाल भी सबके सामने है. अमेरिका में तो इस विषय पर राष्ट्रपति ट्रम्प और संक्रामक बीमारियों के शीर्ष विशेषज्ञ एंथोनी फॉसी के बीच विवाद शुरू हो गया है. लॉकडाउन का असल उद्देश्य वायरस की चेन को तोड़ना है. पीएम चाहते हैं कि 3 मई तक लोग घरों में रहें, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके. मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह बेहद जरुरी है.

इकोनॉमी के बजाय जान बचाना ज्यादा जरुरी

पीएम ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में उनकी प्राथमिकता इकोनॉमी से ज्यादा लोगों की जान बचाना है. दरअसल, लॉकडाउन के चलते देश की आर्थिक रफ्तार थम गई है. इसके अलावा कई उद्योगों के भविष्य और लोगों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है. ऐसे में सरकार पर एक दबाव यह भी है कि किस तरह आर्थिक विकास की गति को बढ़ाया, लेकिन यह लॉकडाउन में फिलहाल संभव नहीं है. हालांकि, प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि मौजूदा समय में लोगों को कोरोना के प्रहार से बचाना ज्यादा जरूरी है. लॉकडाउन बढ़ाये जाने से आने वाले दोनों में आर्थिक मोर्चे पर देश को और नुकसान उठाना पड़ सकता है. एक अनुमान के मुताबिक, इस 19 दिनों के अतिरिक्त लॉकडाउन से देश को 6 से 7 लाख करोड़ रुपए का झटका लग सकता है.

जरुरत के मुताबिक लॉकडाउन में छूट और सख्ती दोनों 

लॉकडाउन को लेकर देशवासियों के खौफ को प्रधानमंत्री ने कुछ कम करने का प्रयास किया है. उन्होंने साफ किया है कि लॉकडाउन में छूट और सख्ती दोनों का समावेश रहेगा. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कोरोना को नियंत्रित करने में सफलता मिल रही है, वहां 20 अप्रैल से छूट प्रदान की जाएगी. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगले एक हफ्ते तक पूरे देश में लॉकडाउन को पूरी सख्‍ती से लागू कर हर क्षेत्र, इलाके, थाने, कस्‍बे पर बारीकी से नजर रखी जाएगी. उसके बाद स्थिति का आकलन करने के बाद ही छूट दी जाएगी. यदि कोई नया इलाका हॉट स्‍पॉट बनता है तो वहां दी गई छूट खत्‍म की जा सकती है.

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